रुपया का धराशायी सफर: क्या 90 के पार आने वाला है सबसे बड़ा आर्थिक संकट

Indian Rupee Hits All Time Low : 12 दिसंबर को भारतीय रुपया अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर 90.56 प्रति अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले दिन के 90.4675 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया। कमजोर घरेलू भावना, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की कमी, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेश के बाहर जाने से रुपया दबाव में रहा।
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया लगातार कमजोर
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.43 से खुला और फिर 90.56 तक गिर गया, जो पिछले बंद स्तर से 24 पैसे कम है। डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापता है, 0.02 प्रतिशत बढ़कर 98.37 पर ट्रेड कर रहा था।
विश्लेषकों की राय
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के अनुसार, रुपये के लिए अगला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस 90.70 और सपोर्ट 90.10 पर आ गया है, जो दर्शाता है कि निकट भविष्य में रुपया और कमजोर हो सकता है।

शेयर बाजार की स्थिति
सुबह के सत्र में निफ्टी 64 अंक बढ़कर 25,963 और सेंसेक्स 189 अंक बढ़कर 84,999 पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरे दिन बाजार में सुधार दिखा, जबकि पहले तीन दिन गिरावट रही।
रुपये की गिरावट का सालाना आंकड़ा
दिसंबर महीने में रुपया 1.15 प्रतिशत गिर चुका है। 2025 के पूरे कैलेंडर वर्ष में यह 5.7 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जो एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन है। यह रुपया 2022 के बाद सबसे खराब वर्ष की ओर बढ़ रहा है, जब यह 11 प्रतिशत गिरा था।
कारण: चालू खाता घाटा और व्यापार समझौते की अनिश्चितता
विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की गिरावट के पीछे भारत का बढ़ता चालू खाता घाटा और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की अनिश्चितता है।
विदेशी निवेशकों का दबाव
Finrex ट्रेजरी एडवाइजर्स के प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने बताया कि डॉलर इंडेक्स कम हुआ है लेकिन रुपया कमजोर हो रहा है क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय इक्विटी और कर्ज़ बेच रहे हैं और व्यापार समझौते की संभावना दूर दिखती है।