गाजियाबाद की वारदात में MBA युवक ने फिंगरप्रिंट छिपाने के लिए टेप का इस्तेमाल किया, पुलिस को चकमा देने की कोशिश

गाजियाबाद के मोदीनगर में ज्वैलर गिरधारीलाल की हत्या कर चर्चा में आए अंकित गुप्ता ने पुलिस कस्टडी में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वारदात से पहले उसने यूट्यूब पर कई वीडियो देखे और क्राइम पेट्रोल जैसे शो देखकर सीखा कि पुलिस को कैसे गुमराह किया जाए। फिंगर प्रिंट न आने पाए इसलिए उसने अपनी उंगलियों पर टेप लगाया था। सब कुछ उसकी प्लानिंग के मुताबिक हो रहा था लेकिन अचानक व्यापारी का बेटा शोरूम में आ गया और भागने का रास्ता बंद कर दिया। इसी वजह से अंकित पकड़ा गया वरना उसे लगता था कि CCTV में दिखने के बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं सकेगी।
कर्ज में डूबकर अपराध की राह पर लौटा
अंकित की कहानी यहीं तक सीमित नहीं थी। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उसने IMR कॉलेज से MBA किया और नोएडा व गाजियाबाद की कई कंपनियों में अच्छी नौकरी की। सालाना 6 लाख रुपए का पैकेज पाकर जिंदगी पटरी पर थी, तभी उसने बीनोमो ऐप पर ट्रेडिंग शुरू की और बिटक्वाइन में बड़ा इन्वेस्ट कर दिया। शुरुआत में उसे लाभ हुआ लेकिन जल्द ही कीमतें गिरीं और वह 10 दिन में 50 लाख रुपए के कर्ज में डूब गया। परिवार को बताया तो उन्होंने 20 लाख रुपए जुटाकर मदद की और बाकी 30 लाख रुपए उसने अलग-अलग बैंकों से लोन लेकर चुकाए। लेकिन 30 लाख के लोन का बोझ उसके सिर पर चढ़ा ही रहा और यहीं से उसके दिमाग में अपराध का बीज पनपा।

ज्वैलर की दुकान पर नजर और दो महीने की तैयारी
अंकित ने कबूल किया कि दो महीने पहले ही उसने लूट की योजना बनाई थी। वह एक दोस्त के साथ गोविंदपुरी मार्केट गया था जहां उसने देखा कि ज्वैलर गिरधारीलाल की दुकान पर न सिक्योरिटी होती है न कोई स्टाफ। काउंटर में कैश और जेवर भरे रहते थे। इसके बाद उसने गूगल और यूट्यूब पर कई वीडियो देखे जिनमें बताया जाता है कि लूट कैसे की जाए और पुलिस से कैसे बचा जाए। उसने दुकान के आसपास की लोकेशन मैप की, आने-जाने के रूट तय किए और गिरधारीलाल की दिनचर्या भी नोट की। 3 दिसंबर को उसने ब्लिंकिट से चाकू, मिर्च पाउडर और कैंची मंगवाई और वारदात के लिए खुद को तैयार कर लिया।
दिनदहाड़े हमला और क्रूर वारदात
4 दिसंबर की सुबह उसने अपने चेहरे को ढककर दुकान में प्रवेश किया। गिरधारीलाल काउंटर पर बैठे थे। अंकित ने उनके चेहरे पर मिर्च पाउडर फेंका लेकिन गिरधारीलाल ने विरोध किया। इसके बाद उसने चापड़ निकाला और वार कर दिया। चापड़ गिरने के बाद उसने चाकू निकाला और 10 सेकंड में 12 वार कर दिए। वह खुद भी स्वीकार करता है कि उसे उस समय कुछ समझ नहीं आ रहा था और उसने अंधाधुंध हमला कर दिया। जब वह काउंटर की चाबी लेने ही वाला था तभी उनका बेटा आ गया। डर के कारण वह भागा लेकिन कुछ दूर ही उसे पकड़ लिया गया। भीड़ ने उसकी जमकर पिटाई की और पुलिस ने किसी तरह उसे बचाया।
मार्केट में गुस्सा और न्याय की मांग
वारदात के बाद मोदीनगर का गोविंदपुरी मार्केट 6 घंटे तक बंद रहा। व्यापारी सड़कों पर बैठकर धरना देने लगे क्योंकि उन्हें ये हत्या बेहद क्रूर लगी। गिरधारीलाल के शरीर पर 10 गहरे घाव पाए गए और अधिक खून बहने की वजह से उनकी मौत हुई। लोग इस बात से भी नाराज थे कि अपराधी ने पोते अभिषेक के जाने का समय तक ट्रैक किया था और जाहिर है वह पूरी योजना बनाकर आया था। पुलिस अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है जबकि अंकित खुद कह रहा है कि उसे जेल जाना है और उसे डर था कि कहीं पुलिस उसका एनकाउंटर न कर दे। यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे कर्ज, लालच और अपराधी मानसिकता मिलकर एक भयानक अपराध को जन्म दे सकते हैं।





