New Delhi: रोहिंग्या मामले में CJI के बयान को लेकर छिड़ा विवाद, न्यायपालिका की गरिमा बचाने के लिए जजों ने किया जवाब

New Delhi: देश में रोहिंग्या मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्या कांत द्वारा कही गई टिप्पणी के खिलाफ उठाए गए सवालों और अभियान की 44 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने चीफ जस्टिस के समर्थन में पत्र जारी कर इस अभियान को गलत बताया है। इससे पहले कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं, हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जजों और विधि विद्वानों ने खुला पत्र लिखकर CJI की टिप्पणी को अनुचित कहा था।
CJI सूर्या कांत की टिप्पणी क्या थी?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में डॉ. रीता मांचंदा की याचिका पर सुनवाई हो रही थी जिसमें कहा गया था कि भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया और वे गायब हो गए। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था, “किसने रोहिंग्याओं को शरणार्थी दर्जा दिया? आप लोग पहले अवैध रूप से सुरंग खोदकर या बाड़ पार करके देश में आते हो और फिर भोजन, पानी, और शिक्षा का अधिकार मांगते हो।” इस टिप्पणी को लेकर CJI को घेरने की कोशिश हुई।

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का पत्र
44 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने लिखा, “हम कड़ी आपत्ति जताते हैं कि सम्माननीय CJI के खिलाफ orchestrated अभियान चलाया जा रहा है। न्यायालयीन कार्यवाही की उचित आलोचना हो सकती है लेकिन यहां तो न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने आगे लिखा कि CJI ने सिर्फ कानून के तहत यह सवाल पूछा कि शरणार्थी दर्जा किसने दिया। यह मूलभूत सवाल है जिसके बिना अधिकारों पर निर्णय संभव नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति, नागरिक हो या विदेशी, भारत में अमानवीय व्यवहार का शिकार नहीं होगा।





